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“मैं इन बातचीत में सीखता हूँ, सिखाने नहीं” : पीएम मोदी छात्रों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ में संवाद

‘परीक्षा पे चर्चा’ (Pariksha Pe Charcha) भारत के सबसे बड़े शैक्षणिक संवाद कार्यक्रमों में से एक है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) प्रतिवर्ष लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से यह संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ छात्रों को परीक्षा टिप्स देना नहीं, बल्कि उनके मनोबल को मजबूत करना, जीवन कौशल (life skills) सिखाना और एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा,

“मैं इन बातचीत में सीखता हूँ, सिखाने

पीएम मोदी की यह पंक्तियाँ इस कार्यक्रम की असल भावना को दर्शाती हैं — यह संवाद एकतरफा शिक्षण सत्र नहीं, बल्कि एक दो-तरफ़ा सीखने और समझने की प्रक्रिया है।


परीक्षा पे चर्चा: एक परिचय और इतिहास

‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की शुरुआत 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर हुई थी ताकि बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं से जुड़े तनाव को कम किया जा सके। यह कार्यक्रम हर साल फरवरी के महीने में आयोजित होता है, जब बोर्ड परीक्षाओं का मौसम अपने चरम पर होता है।

यह कार्यक्रम अब एक देशव्यापी आंदोलन बन चुका है, जिसमें करोड़ों छात्र और उनके परिवार भाग लेते हैं।


कार्यक्रम की 9वीं संस्करण 2026: मुख्य उद्देश्य

2026 में ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण में पीएम मोदी ने छात्रों, शिक्षकों और माता-पिता के साथ बातचीत करते हुए कई अहम संदेश दिए। उनका यह कहना था कि वे इन बातचीत सत्रों से खुद भी सीखते हैं और छात्रों के सवालों तथा विचारों से प्रेरणा लेते हैं। इसी विषय ने सोशल मीडिया और समाचार प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बना दिया है

यह पहल विद्यार्थियों को केवल परीक्षा रणनीति बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तित्व निर्माण, सही सोच, और जीवन कौशल विकास का मंच भी है।


पीएम मोदी का संवाद: सीखने की मानसिकता

पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि ये बैठकें केवल शिक्षक-छात्र के पारंपरिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर “सीखने की प्रक्रिया” हैं। उन्होंने छात्रों के प्रश्नों को गंभीरता से सुना और उसके आधार पर सुझाव, प्रेरणा और जीवन-दृष्टिकोण दिए जो परीक्षा के तनाव से परे हैं।

संवाद का महत्व

ऐसे प्रोग्राम से छात्रों को कई फायदे होते हैं:

  • वे परीक्षा तनाव के प्रबंधन को समझते हैं
  • आत्मविश्वास और सकारात्मकता विकसित होती है
  • समय-प्रबंधन और लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना सीखते हैं
  • स्वयं में सुधार और जीवन कौशल विकसित होते हैं

पीएम मोदी का मानना है कि वास्तविक शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देना है।


छात्रों के सवाल और पीएम मोदी के उत्तर

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए कई सवालों के जवाब दिए, जो सिर्फ विषय-विशेष के नहीं बल्कि जीवन कौशल, अनुशासन, तकनीक के उपयोग और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर भी केंद्रि

कुछ मुख्य विषय जिन पर चर्चा हुई:

  1. परीक्षा का तनाव और उससे निपटना:
    छात्रों ने पूछा कि तनाव को कैसे नियंत्रित किया जाए और इस पर पीएम मोदी ने कहा कि तनाव का सामना सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए—यह परीक्षा का हिस्सा है लेकिन सफलता का अंतिम मानदंड नहीं।
  2. जीवन कौशल और अनुशासन:
    प्रधानमंत्री ने जीवन में अनुशासन, समय-प्रबंधन, और छोटे-छोटे उद्देश्यों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
  3. प्रौद्योगिकी और डिजिटल सन्तुलन:
    पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि वे एआई और तकनीक का बुद्धिमानी से उपयोग करें, न कि तकनीक के गुलाम बनें। (
  4. लक्ष्य निर्धारण:
    उन्होंने छात्र से कहा कि लक्ष्य बड़ा रखें और सकारात्मक बनें, क्योंकि सपने और लक्ष्य ही व्यक्ति को चुनौती और प्रेरणा प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम का प्रसारण और पहुँच

‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ का दूसरा एपिसोड 9 फरवरी को सुबह 10 बजे आयोजित हुआ, जिसे दूरदर्शन के कई चैनलों (DD National, DD News, DD India), ऑल इंडिया रेडियो, और कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव देखा गया। (NDTV)

इस कार्यक्रम में इस बार 4.5 करोड़ से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जो इस कार्यक्रम की लोकप्रियता और छात्रों में इसकी महत्ता को दर्शाता है।


‘सीखने की प्रक्रिया’ का महत्व

जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह इन संवादों में सीखते हैं, तो इसका मतलब यह है कि वे छात्रों की सोच, चिंताएँ और प्रतिक्रियाएँ को समझते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। यह औपचारिक शिक्षा के परे एक मानव-सम्बंध आधारित सीख है, जो छात्रों के दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।

यह दृष्टिकोण छात्रों के लिए भी प्रेरणादायक होता है क्योंकि वे महसूस करते हैं कि उनका नेता न केवल उन्हें मार्गदर्शन देता है, बल्कि उनसे सीखने की इच्छा रखता है


‘परीक्षा पे चर्चा’ के परिणाम और प्रभाव

1. छात्रों में आत्मविश्वास का विकास

छात्रों में आत्म-आत्मिक विश्वास बढ़ता है और वे परीक्षा को एक डर के रूप में नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देख पाते हैं।

2. परीक्षा तनाव में कमी

पीएम मोदी के सुझाव और बातचीत से अधिकांश छात्रों का मानना है कि वे परीक्षा के तनाव को अधिक प्रभावी ढंग से संभाल सकते हैं।

3. अभिभावकों और शिक्षकों का सहारा मिलना

इस कार्यक्रम में अभिभावक और शिक्षक सहभागिता भी महत्वपूर्ण होती है, जिससे वे छात्रों के दृष्टिकोण को समझ सकते हैं और उन्हें बेहतर समर्थन दे सकते हैं।


पीएम मोदी का संदेश: सीख, समझ और अग्रसर

पीएम मोदी की यह बात — कि वे “सीखने के लिए संवाद में शामिल होते हैं”— यह एक ऐसा सन्देश है जो शिक्षक-छात्र पारंपरिक ढाँचे से ऊपर उठकर नई शिक्षा के मार्ग को रेखांकित करती है।

यह सन्देश छात्रों को यह भी बताता है कि जीवन की सच्ची शिक्षा केवल किताबों में नहीं, बल्कि अनुभवों, संवादों और समझ में भी छिपी है।


निष्कर्ष

‘परीक्षा पे चर्चा’ केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सकारात्मक परिवर्तन-यात्रा है जो छात्रों को मानसिक, भावनात्मक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाती है। प्रधानमंत्री मोदी के विचारों के अनुसार:

  • शिक्षा का असली उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं है।
  • वास्तविक शिक्षा छात्रों को सशक्त बनाने, सीखने की उत्सुकता बढ़ाने और जीवन कौशल विकसित करने में है।
  • संवाद प्रक्रिया दो-तरफ़ा है — प्रधानमंत्री छात्रों से सीखते हैं, और छात्र उनसे।

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