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दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब: AQI 267 के साथ ‘Poor’ श्रेणी में प्रवेश


दिल्ली की वायु गुणवत्ता पिछले कुछ दिनों से लगातार खराब हो रही है और सोमवार को राजधानी में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 267 के स्तर तक पहुँच गया, जिसे ‘Poor (खराब)’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। यह स्थिति शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि सामान्यतः ‘Poor’ श्रेणी में मौजूद प्रदूषण के स्तर से सांस लेने में परेशानी, एलर्जी, आँखों में जलन और लंबे समय तक रहने से गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं।

AQI क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक मापदंड है जो वायु में मौजूद प्रदूषकों जैसे PM2.5 और PM10, NO₂, SO₂ आदि के स्तर को दर्शाता है। इसका लक्ष्य यह बताना है कि हवा श्वसन स्वास्थ्य के लिए कैसी है। CPCB (सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के अनुसार

  • 0-50: अच्छा
  • 51-100: संतोषजनक
  • 101-200: मध्यम
  • 201-300: खराब (Poor)
  • 301-400: बहुत खराब (Very Poor)
  • 401 और ऊपर: गंभीर (Severe) श्रेणी मानी जाती है।

जब AQI 201-300 के बीच होता है, तो सामान्य लोगों कोले थकान या असुविधा महसूस हो सकती है, जबकि संवेदनशील समूहों — जैसे बच्चों, वृद्धों और सांस की बीमारी वाले लोगों को गंभीर प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण की वर्तमान स्थिति

हाल के आँकड़ों के अनुसार सुबह लगभग 7 बजे शहर का 24-घंटे का औसत AQI 267 तक बढ़ा, जो ‘Poor’ श्रेणी में आता है। यह पिछले कुछ दिनों की तुलना में हवा की गुणवत्ता में गिरावट को दर्शाता है, क्योंकि उससे पहले कई स्थानों पर AQI ‘Moderate’ (मध्यम) श्रेणी में भी देखी गई थी।

मुख्य रूप से सुबह की ठंडी हवा, घना कोहरा और कम हवाएँ प्रदूषकों को स्थल पर रोकती हैं, जिससे कणों का स्तर बढ़ जाता है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में अभी भी ठंड के कारण हवा का प्रसार धीमा है, जिसका सीधा असर AQI पर पड़ता है।

कण और प्रदूषण का मुख्य कारण

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं:

  • वाहनों का उत्सर्जन — दिल्ली के भीषण ट्रैफिक से निकलने वाली धुएँ की मात्रा AQI को प्रभावित करती है।
  • पराली जलाना — आसपास के राज्यों में खेतों की पराली जलने से निकलने वाला धुआँ हवा में मिला रहता है और दिल्ली में प्रवेश करता है।
  • निर्माण और उद्योग से निकलने वाला धूल-धूल कण।
  • मौसम कारक — शीतल वायु, कम हवा की गति और कोहरे की स्थिति भी प्रदूषण को फैलने से रोकती है।

जब यह सब कारक एक साथ मिलते हैं, तो हवा की गुणवत्ता और भी तेज़ी से बिगड़ सकती है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

जहाँ AQI ‘Poor’ श्रेणी में है, वहाँ लोगों को सांस लेने में कठिनाई, खांसी, आंखों में जलन, गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खासकर बच्चे, वृद्ध और दिल-फेफड़े की बीमारी वाले लोग और भी प्रभावित होते हैं। यदि प्रदूषण इसी तरह जारी रहता है तो स्वास्थ्य-सम्बंधी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

सरकार और एजेंसियों की प्रतिक्रिया

वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार और संबंधित संस्थाएँ निरंतर काम कर रही हैं। दिल्ली-NCR में CPCB और स्थानीय प्रशासन द्वारा AQI मॉनिटरिंग, वाहन प्रतिबंध, और निर्माण कार्यों पर निगरानी जैसे उपाय लागू किए जाते हैं ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। इसके बावजूद मौसम की स्थिति और अन्य कारक गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

प्रदूषण से निपटने के उपाय

वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए नागरिक भी अपने स्तर पर कई कदम उठा सकते हैं:

  • वाहन साझा करना या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग।
  • वाहन उत्सर्जन परीक्षण समय-समय पर कराना।
  • घरेलू कचरा जलाने से बचना, विशेषकर पराली।
  • पौधे लगाना और हरित क्षेत्र बढ़ाना

ये छोटे-छोटे प्रयास मिलकर वायु-गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।


निष्कर्ष

दिल्ली की वायु गुणवत्ता वर्तमान में ‘Poor (खराब)’ श्रेणी में बनी हुई है, जहाँ AQI स्तर 267 के आसपास दर्ज किया गया है। यह स्थिति मौसम, वाहनों के उत्सर्जन, और प्रदूषण के अन्य स्रोतों के मिलन का परिणाम है। शहरवासियों के लिए यह चेतावनी है कि प्रदूषण के प्रभावों से बचने के लिए आवश्यक सावधानियाँ अपनाई जाएँ और वायु-गुणवत्ता को सुधारने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएँ।


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