(पीयूष गोयल: समझौते ने प्रगति की तरंग पैदा की, भारत-यूएई CEPA के 4 साल पूरे)
आज 18 फरवरी, 2026 को, Piyush Goyal ने भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) की 4वीं वर्षगांठ पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच आर्थिक सहयोग में एक बड़े बदलाव और प्रगति की तरंग (ripple effect of progress) लेकर आया है। इस साझेदारी ने दोनों देशों के व्यापार, निवेश, रोजगार, कृषि, सेवाओं और विनिर्माण जैसे कई क्षेत्रों में स्थायी सकारात्मक प्रभाव डाला है। (The Tribune)
इस लेख में हम CEPA की पृष्ठभूमि, उसके प्रभाव, लाभ, चुनौतियाँ, उपलब्धियाँ और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि पाठकों को स्पष्ट जानकारी मिले
CEPA क्या है? — एक परिचय
Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) एक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौता है जिसे भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने फरवरी 2022 में हस्ताक्षर किया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को हटाना, निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना, सेवा क्षेत्र में सहयोग और आर्थिक विकास को साझा करना है। व्यापार समझौता 1 मई, 2022 से लागू हुआ था, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की सीमा पार व्यापार दरों में भारी कमी तथा नई बाजार पहुंच सुनिश्चित हुई।
CEPA के तहत:
- 80% से ज्यादा उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी में कमी या हटाई गई।
- सेवाओं के क्षेत्र में दो-तरफ़ा बाजार तक पहुंच खुली।
- तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग से व्यापारिक बाधाएँ कम हुईं।
- नई निवेश-प्रोत्साहन पहल और संयुक्त व्यापार कमेटियाँ स्थापित हुईं।
इन नीतियों ने दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों के लिए नई संभावनाओं और अवसरों का द्वार खोला है।
CEPA की चार वर्ष की यात्रा: प्रगति, परिणाम और आंकड़े
📊 1. व्यापार का अभूतपूर्व विस्तार
पीयूष गोयल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत-UAE का द्विपक्षीय व्यापार एक ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया — लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक। यह CEPA लागू होने के चार साल बाद एक बड़ी उपलब्धि है। (The Tribune)
सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि नॉन-ऑयल व्यापार में भी लगभग 68 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गयी — जो दर्शाता है कि पारंपरिक ऊर्जा आधारित व्यापार के अलावा अन्य क्षेत्रों ने भी तेज़ी से प्रगति की है। (The Tribune)
📈 2. वृद्धि का असर: नए आयाम
CEPA के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति देखने को मिली:
✔ फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग गुड्स ने निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की।
✔ कीमती पत्थर और आभूषण निर्यात में मजबूत वृद्धि से भारत को लाभ मिला।
✔ कृषि निर्यात में विस्तार और भारतीय कृषि उत्पादों को उभरते वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिली।
✔ आईटी और सेवा क्षेत्र ने क्षेत्रीय डिजिटल सहयोग को बढ़ाया।
✔ छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक अवसर मिलें। (The Tribune)
इन आंकड़ों और रुझानों से स्पष्ट होता है कि CEPA सिर्फ सांख्यिकीय समझौता नहीं है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक प्रगति के लिए एक रणनीतिक इंजन बन गया है।
समझौते का “Ripple Effect of Progress” क्या दर्शाता है?
पीयूष गोयल ने इसे “प्रगति की तरंग प्रभाव” (ripple effect of progress) कहा है — जिसका मतलब यह है कि CEPA का प्रभाव केवल क्रय-विक्रय तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह:
👉 📌 1. उत्पादन क्षेत्र (Manufacturing) को बढ़ावा देता है
अन्य देशों के मुकाबले भारत के विनिर्माण क्षेत्र को विस्तार के लिए बड़ा बाजार मिला है, जिससे उत्पादन लागत में कमी, निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन को बल मिला है।
👉 📌 2. सेवाओं और ज्ञान-आधारित व्यवसाय को गति मिली
आईटी, डिजिटल सेवाओं, स्टार्टअप सहयोग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्रों में व्यापार और साझेदारी के नए मार्ग खुले हैं।
👉 📌 3. कृषि सेक्टर में नए अवसर
भारतीय किसान अब यूएई जैसे उभरते बाजारों में उन्नत कृषि उत्पादों को निर्यात कर सकते हैं और अपने बाजार व लाभ को विस्तारित कर सकते हैं।
👉 📌 4. निवेश और FDI में वृध्दि
CEPA के बाद UAE से भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में लगभग 75% की वृद्धि देखी गयी, जिससे उद्योगिक परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा मिली है।
CEPA से जुड़े व्यापारिक और निवेश लाभ
📌 1. निवेशकों का भरोसा और सहयोग
UAE ने भारत को अपनी निवेश सूची में सातवाँ सबसे बड़ा निवेशक बनाया है। यह निवेश न केवल पूंजी को बढ़ाता है बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग को भी बढ़ावा देता है।
📌 2. सेबिल व्यापार और उद्यम सहयोग
जैसे Bharat Mart जैसे पहलें भारत के निर्यात को संस्थागत रूप से पश्चिम एशिया में मजबूत करने के लिए शुरू किए गए हैं।
📌 3. MSMEs और स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच
CEPA ने छोटे और मझोले उद्यमों के लिए प्रमुख बाजार पहुंच सुनिश्चित की है। इससे इन व्यवसायों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिला है और उनके कारोबार का विस्तार हुआ है।
व्यापार विस्तार के क्षेत्र
💼 1. विदेश व्यापार में विविधता
CEPA ने तेल पर निर्भरता को कम करके नॉन-ऑयल उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा दिया है। यह रणनीति भारत की अर्थव्यवस्था को आर्थिक विविधता और स्थिरता प्रदान करती है।
🛍️ 2. प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में उन्नति
भारत के फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, कीमती पत्थर, टेक्सटाइल्स जैसे निर्यात क्षेत्र CEPA के बाद काफी आगे बढ़े हैं क्योंकि अब उन्हें दो-तरफा बाज़ार तक बेहतर पहुंच मिली है।
🧑💻 3. सेवा क्षेत्र का विस्तार
आईटी, वित्तीय सेवाएँ, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को CEPA के माध्यम से दुगुना समर्थन मिला, जिससे रोजगार और व्यापार की संभावनाएँ और बढ़ीं हैं।
CEPA से भारत-UAE भागीदारी को दी गई नई पहचान
यह समझौता सिर्फ दुई देशों के बीच व्यापार में वृद्धि का साधन नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक दिशा का प्रतीक बन गया है। इससे भारत को कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठनों और बाजारों में प्रवेश लाभ मिला है।
UAE और भारत दोनों CEPA को लंबी अवधि की रणनीति मानते हैं, जो भविष्य में ऊर्जा, तकनीक, निवेश, वित्तीय सेवाओं, डिजिटल मुद्रा और वित्तीय इंटरकनेक्टिविटी जैसी पहलों को भी आगे बढ़ा सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ और लक्ष्य
CEPA केवल एक समझौता नहीं, बल्कि इतिहास के अगले अध्याय की शुरुआत है। दोनों देशों ने 2030 तक नॉन-ऑयल व्यापार को 100 अरब डॉलर्स तक ले जाने के लक्ष्य पर सहमति जताई है।
इसके साथ ही:
✔ दोनों देश वित्तीय और डिजिटल मुद्रा सहयोग को बढ़ा रहे हैं।
✔ स्टार्टअप इकोसिस्टम और निवेश नेटवर्क को मजबूत बनाने पर कार्य धीमा नहीं है।
✔ अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं और निवेश योजनाओं के लिए भी साझेदारी बढ़ रही है।
इस प्रकार, CEPA भविष्य में नई आर्थिक संभावनाओं, वैश्विक साझेदारियों और व्यापार विविधता का मार्ग खोल रहा है।
निष्कर्ष: CEPA और भारत की आर्थिक प्रगति
चार साल बाद, भारत-UAE CEPA न केवल व्यापार आंकड़ों को बढ़ावा देने में सफल रहा है, बल्कि इसने आर्थिक साझेदारी की नींव को भी मजबूत किया है।
पीयूष गोयल के शब्दों में, इस समझौते ने एक “pragati ki tarang” यानी प्रगति की तरंग पैदा की है, जो विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, MSMEs और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में फैल रही है। (The Tribune)
इसलिए CEPA का प्रभाव केवल चार साल में ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके लाभ आने वाले कई वर्षों में भारत की वैश्विक आर्थिक प्रतिष्ठा, बाजार विस्तार और वैश्विक साझेदारी में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा।



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