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लोक सभा ने 64 पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स का गठन किया: भारतीय संसद की वैश्विक कूटनीति में एक नया अध्याय

भारतीय संसद ने फरवरी 2026 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। Nishikant Dubey, Shashi Tharoor, Abhishek Banerjee सहित कई सांसदों को लोक सभा द्वारा गठित 64 पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स (Parliamentary Friendship Groups — PFGs) का नेतृत्व करने के लिए नामित किया गया है। यह पहल भारतीय विदेश नीति और संसदीय कूटनीति को नए आयाम देने और देशों के बीच संसदीय सहयोग विकसित करने का प्रयास है। इस पहल का उद्देश्य न केवल देशों के प्रतिनिधियों के बीच संबंध मजबूत करना है, बल्कि भारत की वैश्विक प्रशंसा, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करना भी है।


1. Parliamentary Friendship Groups क्या होते हैं?

Parliamentary Friendship Groups (PFGs) संसदीय समूह होते हैं जिनका उद्देश्य भारत के सांसदों को अन्य देशों के विधायकों के साथ संपर्क, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। यह एक संसदीय कूटनीति का माध्यम है, जहां सांसद अपने सहभागियों के साथ विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इन समूहों के गठन का मुख्य लक्ष्य है:

  • दो देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूती देना
  • व्यापक वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना
  • व्यापार, संस्कृति, शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी मुद्दों पर सहयोग को बढ़ाना
  • लोकतांत्रिक मूल्यों और विचारों का सम्मान और साझा करना

प्रत्येक फ्रेंडशिप ग्रुप में लगभग 11 सांसद शामिल होते हैं, जिनमें से एक ग्रुप लीडर (Group Leader) होता है जो उस समूह का नेतृत्व करता है।


2. 64 Parliamentary Friendship Groups का गठन: भारत की वैश्विक रणनीति

लोक सभा स्पीकर ओम बिड़ला की अध्यक्षता में 24 फरवरी 2026 को 64 Parliamentary Friendship Groups का औपचारिक गठन किया गया। इस पहल के पीछे मुख्य रूप से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्ताव था, जिसका लक्ष्य भारत की संसदीय और कूटनीतिक पहुँच को वैश्विक स्तर पर विस्तारित करना है।

ये समूह 61 देशों और 3 वैश्विक संस्थाओं के साथ गठित किए गए हैं, जिसमें यूरोपीय यूनियन और स्कैंडिनेवियाई देशों को भी शामिल किया गया है। इस प्रकार, भारत की संसदीय पहुंच अब उन देशों तक भी विस्तारित हो रही है जिनके साथ पहले संसदीय सहयोग की सीमित बातचीत हुई थी।


3. पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप का उद्देश्य और महत्व

(a) संसदीय कूटनीति को आगे बढ़ाना

Parliamentary Friendship Groups संसदीय कूटनीति को मजबूत करने का एक आदर्श साधन हैं। पारंपरिक कूटनीति आम तौर पर राजनीतिक नेतृत्व और विदेश मंत्रालयों के बीच होती है। लेकिन संसदीय कूटनीति के माध्यम से आम सांसद भी अंतरराष्ट्रीय समीकरणों और साझेदारी को समझने तथा प्रभावित करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।


(b) दो-तरफा संवाद को बढ़ावा देना

इन फ्रेंडशिप ग्रुप्स के माध्यम से भारत के सांसद विभिन्न देशों के सांसदों के साथ नियमित संवाद कर सकते हैं। यह संवाद दो-तरफा सहयोग, संयुक्त बैठकों, संसदीय बैठकों और सत्रों को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। इससे विधायी अनुभव साझा होता है और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुलते हैं।


(c) व्यापार, संस्कृति और संयुक्त हितों पर सहयोग

देशों के बीच केवल राजनयिक संबंधों के अलावा, व्यापार, संस्कृति, तकनीकी सहयोग, शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी संसदीय सदस्यों के सहयोग से चर्चा और समन्वय किया जा सकता है। इससे सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी देशों के बीच बेहतर समझ स्थापित होती है।


4. समूह नेतृत्व: प्रमुख सांसद और उनके समूह

लोक सभा द्वारा गठित इन 64 Parliamentary Friendship Groups में कई प्रमुख सांसदों को समूहों का नेतृत्व सौंपा गया है। इसमें शामिल हैं:

🔹 Nishikant Dubey

राजनीतिक रूप से सक्रिय, भाजपा से सांसद निशिकांत दुबे को रूस के लिए फ्रेंडशिप ग्रुप का नेतृत्व सौंपा गया है। यह समूह दोनों देशों के विधायिकीय सहयोग को बढ़ाने और रक्षा, व्यापार तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बेहतर बनाने का काम करेगा।


🔹 Shashi Tharoor

कांग्रेस पार्टी के सीनियर सांसद शशि धरूर को फ्रांस समूह का नेतृत्व सौंपा गया है। शशि धरूर का अनुभव वैश्विक राजनीति और संसदीय कूटनीति में माना जाता है, और वे भारत-फ्रांस के बीच सहयोग को और मजबूत बनाएंगे।


🔹 Abhishek Banerjee

तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी को अल्जीरिया के लिए फ्रेंडशिप ग्रुप का नेतृत्व दिया गया है, जहां वे दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर संसदीय संवाद को बढ़ावा देंगे।


🔹 अन्य उल्लेखनीय समूह नेता

इसके अलावा सम्मिलित क्षेत्रों और देशों के प्रति फ्रेंडशिप ग्रुप का नेतृत्व करने वाले अन्य सांसदों में शामिल हैं:

  • बिप्लब कुमार देब (भूटान)
  • बाइजयंत पांडा (संयुक्त राज्य अमेरिका)
  • हेमा मालिनी (दक्षिण अफ्रीका)
  • गौरव गोगोई (फिलिपींस)
  • पूनमबेन हेमंतभाई माडम (कज़ाखस्तान)
  • कनिमोझी करुणानिधि (ग्रीस)
  • असदुद्दीन ओवैसी (ओमान)

और भी कई सांसदों को विकसित देशों तथा रणनीतिक साझेदारों के लिए फ्रेंडशिप ग्रुप का नेतृत्व सौंपा गया है ताकि भारत अपनी वैश्विक पहुँच और प्रभाव को बढ़ा सके।


5. PFGs का भारत-विदेश नीति में योगदान

(a) पार्लियामेंटरी कूटनीति और लोक समर्थन

Parliamentary Friendship Groups संसद और विदेश नीति की शाखों के बीच सेतु का कार्य करती हैं। संसदीय संवाद से नागरिक स्तर पर भी सहयोग के अवसर उत्पन्न होते हैं, क्योंकि संसद सदस्य आम जनता के प्रतिनिधि हैं। इससे लोक समर्थन और वैश्विक मुद्दों पर जनता की समझ भी बेहतर होती है।


(b) Operation Sindoor के संदर्भ में पहल

PFGs की स्थापना Operation Sindoor के बाद हुई, जिसमें multi-party संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत के दृष्टिकोण को विश्व स्तर पर साझा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अनुभव को संसदीय कूटनीति को institutionalize करने का अवसर माना, जिससे PFGs का जन्म हुआ।


(c) वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार

यह पहल भारत को ग्रेटर संसद-टू-पार्लियामेंट संवाद के माध्यम से वैश्विक लोकतंत्र और साझा मूल्यों के प्रसार में भी सहायक बनाती है। संसदीय सदस्य विभिन्न देशों के विधायकों के अनुभवों से सीखते हैं और वैश्विक मुद्दों पर साझा निर्णय को आगे बढ़ाते हैं।


6. द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग में PFG की भूमिका

(a) व्यापार और आर्थिक सहयोग

राजनीतिक संवाद से व्यापार, तकनीकी साझेदारी और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलती है। इससे निवेश, व्यापार समझौते और अनुसंधान साझेदारी को बढ़ावा मिलता है।


(b) शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सहयोग

PFGs संसदीय स्तर पर सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देते हैं। इससे लोगों-से-लोगों के बीच संबंध मजबूत होते हैं, जो भारत की “नरेंद्र मोदी की विदेश नीति” के मूल उद्देश्यों में से एक है।


7. आलोचना और चुनौतियाँ

(a) संसदीय चरित्र और आलोचना

कुछ आलोचकों का कहना है कि संसदीय फ्रेंडशिप ग्रुप केवल symbolic प्रयास हैं, जो वास्तविक कूटनीति में ज्यादा प्रभाव नहीं डाल सकते। विशेषकर जब राजनीतिक मतभेद विदेश नीति पर भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालते हैं, तो PFGs का प्रभाव सीमित हो सकता है।


(b) संसदीय मतभेदों का प्रभाव

राष्ट्रीय स्तर पर विविध राजनीतिक विचारधाराएँ संसदीय सहयोग को चुनौती दे सकती हैं, जैसे कि यात्रा प्रतिबंध के मुद्दों पर कुछ सांसदों ने अपनी आपत्ति भी जताई है कि समूह नेतृत्व के बावजूद उन्हें वास्तविक संसदीय भागीदारी में कठिनाइयाँ हो सकती हैं।


8. भविष्य के आयाम: क्या उम्मीदें हैं?

(a) द्विपक्षीय संसद संवाद की दिशा

यह कदम अन्तरराष्ट्रीय संसद सहयोग को नए स्तर पर ले जाने का अवसर है, जिसमें भारत और अन्य देशों के विधायकों के बीच लगातार संवाद, साझा पहल, और सार्वजनिक संवाद की उम्मीद है।


(b) संयुक्त वैश्विक प्रतिक्रिया और साझेदारी

Parliamentary Friendship Groups के माध्यम से कई देशों के सांसद एक मंच पर मिलेंगे, जिससे व्यापक वैश्विक जवाबदेही और साझा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह वैश्विक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, मानवाधिकार, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और डिजिटल नीति में सहयोग के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है।


निष्कर्ष: लोकतांत्रिक सहयोग और विश्वस्तर पर भारत की भूमिका

लोक सभा द्वारा 64 Parliamentary Friendship Groups का गठन एक ऐतिहासिक और प्रगतिशील कदम है जिसने भारतीय संसदीय कूटनीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पहल न केवल भारत के विदेश नीति एजेंडा को मजबूत बनाती है बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक जुड़ाव और सहयोग के नए अवसर प्रदान करती है। पावरफुल संवाद और संसदीय नेतृत्व से यह पहल दीर्घकालिक सहयोग, सहयोगात्मक दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय भूमिका को और ऊँचा उठाएगी।

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