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तथाकथित ईरानी ‘खतरे’ की कोई वास्तविकता नहीं थी”: ईरान के विदेश मंत्री अराघची का अमेरिका पर हमला और रुबियो का बचाव

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नवीनतम मोड़

आज वैश्विक राजनीति एक नए मोड़ पर है जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के खिलाफ बढ़ी हुई सैन्य कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चुनौतियाँ पैदा कर दी हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा दी गई है, जिन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि “कभी भी कोई तथाकथित ईरानी ख़तरा मौजूद नहीं था।” इस बयान ने विश्व स्तर पर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है और अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। (The Tribune)

साथ ही, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने ईरानी प्रतिक्रिया का प्रतिफ़ल बताते हुए अमेरिका की कार्रवाई का बचाव किया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि क्या हुआ, क्यों हुआ, और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।


ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की पृष्ठभूमि

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव वर्षों से बना हुआ है, खासकर जब से अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाए और उसके परमाणु कार्यक्रम तथा रॉकेट क्षमता को लेकर चेतावनियाँ दीं। हालांकि ईरान बार-बार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और उसने कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा नहीं जताई। (Philstar.com)

इस सिलसिले में हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शिकायतें और राजनीतिक तनाव अधिक बढ़े जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश इज़राइल के साथ मिलकर सैन्य आकड़ें सक्रिय हुए। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि संयुक्त राज्य-इज़राइल गठबंधन द्वारा ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है। (Reuters)


अराघची का विवादित बयान

“कोई सच का ईरानी ख़तरा नहीं था” — अराघची

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया और इंटरव्यू के माध्यम से स्पष्ट रूप से कहा कि:

“कभी भी कोई तथाकथित ईरानी ख़तरा मौजूद नहीं था। यह कोई वास्तविक खतरा या हमला नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति थी जिसने आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।” (The Tribune)

अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका ने यह आरोप इसलिए लगाए क्योंकि उसे ईरान पर दबाव बनाने के लिए किसी न किसी बहाने की ज़रूरत थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान न तो परमाणु हथियार चाहता है और न ही किसी देश पर हमला करने की योजना बनाई है। (Philstar.com)

उनका कहना था कि:

  • अमेरिका ईरान को अस्थिर दिखाने की कोशिश कर रहा है।
  • वास्तविकता में ईरान शांतिपूर्ण नीतियों का समर्थन करता है।
  • ईरान ने हमेशा उस समय तक शांतिपूर्ण समाधान की ओर रुख किया जब तक उग्रता उत्तरदायी रूप से थोपने की कोशिश नहीं की गई। (ABC7 New York)

अराघची ने यह भी जोर दिया कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए खुद को सशक्त महसूस करता है और अगर उस पर हमला किया गया तो वह आत्मरक्षा का हर वैध अधिकार इस्तेमाल करेगा। (The Indian Express)


अमेरिका का प्रतिवाद — रुबियो का पक्ष

रुबियो का बयान और अमेरिका का रुख

वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस पूरे विवाद पर अमेरिका का पक्ष दिया है। अमेरिका का कहना है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाइयाँ सुरक्षा कारणों से की हैं, और उन्होंने ईरान को एक गंभीर वैश्विक ख़तरे के रूप में देखा था

रुबियो के अनुसार, संयुक्त राज्य की सैन्य कार्रवाई:

  • ईरान को अपनी मिसाइल और हथियार क्षमता सीमित करने के लिए आवश्यक थी।
  • अमेरिका ने यह कदम लिया क्योंकि उसने संभावित ख़तरे को गंभीरता से लिया।
  • वैश्विक तथा क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था। (Wikipedia)

रुबियो की दलील थी कि ईरान की कार्रवाइयाँ अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक “असंभव और भारी खतरे” की तरह सामने आ सकती थीं, और इसलिए अमेरिका को अग्रिम नजरिए से सैन्य और राजनयिक कार्रवाई करनी पड़ी। (Wikipedia)


विश्लेषण: दोनों पक्षों के बीच मतभेद

1. ईरान का रुख

ईरान का कहना है कि उसने कभी भी किसी देश को धमकाया नहीं और न ही आतंक फैलाने का उद्देश्य रखा। अराघची के अनुसार अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा कूटनीति और बातचीत से समाधान चाहता है, न कि युद्ध से। (Press TV)

अराघची सहित अन्य ईरानी अधिकारी यह भी कहते हैं कि:

  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
  • ईरान को रक्षा के लिए सैन्य तैयारी का अधिकार है।
  • अमेरिका तथा उसके सहयोगी लगातार ईरान के प्रति अनुचित दबाव बना रहे हैं। (Philstar.com)

2. अमेरिका का रुख

दूसरी तरफ, अमेरिका की नीतियाँ यह दर्शाती हैं कि:

  • उसने ईरान को एक संभावित क्षेत्रीय और वैश्विक ख़तरे के रूप में देखा है।
  • ईरान के मिसाइल और हथियार क्षमता पर रोक लगाने के लिए कठोर कदम उठाए गए हैं।
  • अमेरिका वैश्विक शांति के संरक्षक के रूप में स्थित है, इसलिए उसने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई समर्थन की है। (Wikipedia)

रुबियो जैसे अधिकारियों का कहना है कि अगर ईरान अपनी मिसाइल क्षमता और समर्थन विभिन्न आतंकवादी समूहों को जारी रखता है, तो वह विश्व सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। (Wikipedia)


वैश्विक राजनीति और परिणाम

1. संयुक्त राष्ट्र में प्रतिक्रिया

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है जिसमें उसने अमेरिका की कार्रवाइयों को “अवैध” और “आक्रामक” बताया है। (The Economic Times)


निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिलता

ईरान और अमेरिका के बीच यह विवाद केवल दो देशों के बीच का मामला नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति के व्यापक परिणामों को दर्शाता है। हर देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार अपनी रणनीति बनाता है, लेकिन इससे वैश्विक शांति और सुरक्षा पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

ईरान का मानना है कि उस पर आरोप लगाए जा रहे हैं जो वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं, जबकि अमेरिका का दावा है कि उसने सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाए। इस लड़ाई का परिणाम सिर्फ़ राजनीतिक घोषणा नहीं होगा, बल्कि इसका असर वैश्विक आर्थिक, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और भू-राजनीति पर लंबी अवधि तक रहेगा। (Reuters)


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